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क्या कोरोना से निपटने को तैयार है भारत?

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कोरोना वायरस का खौफ बढ़ता जा रहा है, स्कूल-कॉलेज, मॉल, खेल आयोजन आदि बंद कर दिए गए हैं, लेकिन इस खौफनाक बीमारी को रोकने और इसके उपचार के लिए सरकार क्या कर रही है, इसका कोई रोडमैप सामने नहीं आया है। सरकार गिरते शेयर बाजार और डूबते बैंकों को उबारने की तिकड़म लगाने में व्यस्त दिख रही है, जबकि निवेशकों के लाखों करोड़ निगलते कोरोना वायरस से निपटने की तरफ सरकार का ध्यान जाता नहीं दिखता।

सरकार की तरफ से अभी तक सिर्फ एहतियात बरतनें की सलाहें , न घबराने का सबक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ताजा मामलों की जानकारी ही दी जा रही है। आंकड़े सबूत हैं कि सरकारी स्तर पर इस बीमारी को अनदेखा करने के क्या परिणाम हुए हैं और चीन के साथ ही ईरान और इटली मिसाल हैं। अलग-अलग देशों से आ रही रिपोर्टें बताती हैं कि जो आंकड़े सामने आए हैं, यह बीमारी उससे कई गुना ज्यादा पैठ बना चुकी है।

दरअसल शुरु में जब चीन में इस बीमारी की दस्तक का दुनिया को पचा लगा तो इसे रोक पाने में चीन की नाकामी और बाद में नाकामी से सबक लेने के बजाय दुनिया चीन के खानपान और चमगादड़ गिनाने में लग गई। चीन का उपहास उड़ाने वाले कई विकसित देशों ने अपने नागरिकों की जान खतरे में डाल दी। इटली, ईरान और अमेरिका की मिसालें सामने हैं। सिर्फ एक सप्ताह में ही इस वायरस से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

फिलहाल इस बीमारी से बचने का एक ही उपाय सामने आया है और वह है लोगों को एक दूसरे से मिलने से रोकना। इसका नमूना भी चीन ने ही पेश किया जब उसने अपने शहरों को लॉकडाउन कर दिया। इटली, जर्मनी, ईरान और अमेरिका ने यह कदम तब उठाया जब हालात हाथ से निकल चुके थे और भारत इक्का दुक्का को छोड़कर इस पर अभी तक विचार ही कर रहा है। हां, विदेशों से आने वाले लोगों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन स्टूडेंट वीजा और डिप्लोमेटिक वीजा पर कोई रोक नहीं है।

लॉकडाउन क्यों जरूरी है, इसे चीन के ह्युवेई प्रांत से समझ सकते हैं। सबसे पहले समझते हैं कि इस बीमारी का पता कैसे लगा:

  • 26 दिसंबर को वुहान में एचआईसीडब्लूएम हॉस्पीटल के डॉक्टर जिंग्सियांग झांग ने चार मरीजों में निमोनिया जैसी लगने वाली अजीब बीमारी देखी।
  • झांग ने 27 दिसंबर को इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी।
  • 28 और 29 दिसंबर को ठीक वैसी ही बीमारी वाले तीन और मरीज उनके पास आए।
  • 30 दिसंबर को भी कुछ और मरीज आने लगे। 31 दिसंबर को वुहान हेल्थ कमीशन ने चीन सरकार के केंद्रीय हेल्थ कमीशन को एक अनजान बीमारी के बारे में अलर्ट किया।
  • उसी दिन चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी इस बीमारी के बारे में जानकारी दी।
  • इसके साथ ही चीन ने अनजान बीमारी की आहट लगते ही वुहान में समुद्री जीवों की खरीद फरोख्त वाले बाजार को बंद कर दिया। इस दौरान इस बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी रही
  • 7 जनवरी को चीनी डॉक्टरों ने इस बीमारी को फैलाने वाले नई प्रजाति वाले कोरोना वायरस एन कोव 2019 के रूप में पहचान की
  • 12 जनवरी को डॉक्टरों ने बीमारी के जेनेटिक सिक्वेंस यानी जैविक संरचना को दुनिया के बाकी देशों के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की संस्थाओं के साथ साझा किया ताकि उन्हें बीमारी पहचानने में मदद मिले
  • 13 जनवरी को पहली बार एन कोव 2019 के लिए टेस्ट किट तैयार की गई
  • 20 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे कोविड-19 नाम देते हुए इसे बी कैटेगरी (नोटिस देना जरूरी) वाली बीमारी घोषित कर दिया
  • 23 जनवरी को चीन ने वुहान शहर को पूरी तरह बंद कर दिया
  • अगले दिन यानी 24 जनवरी को 15 और शहरों को पूरी तरह बंद कर दिया गया, लोगों को घरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई

लॉक डाउन के बाद बीमारी के चीन से बाहर यानी अंतरराष्ट्रीय फैलाव को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 30 जनवरी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी, जिससे हर देश को इस तरह की बीमारी की सूचना विश्व स्वास्थ्य संगठन को देना जरूरी हो गया। चीन के बाकी हिस्से को वुहान शहर से अलग रखने का सीधा असर दिखा और चीन के बाकी हिस्से में नए मरीजों की संख्या किसी तरह नियंत्रित कर ली गई। लेकिन इस दौरान 20 फरवरी से लेकर पांच मार्च तक दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान में यह संख्या तेजी से बढ़ने लगी

चीन ने जनवरी में वुहान और दूसरे शहरों में जो जो कदम उठाए उसका सीधा असर दिखा। इस दौरान इटली, ईरान और अमेरिका के पास एक महीने का समय था लेकिन इन सरकारों ने वही कदम बहुत देर से उठाए।

12 मार्च तक के आंकड़े बताते हैं कि नए मरीजों की संख्या चीन में 18 है, तो ईरान में एक हजार से ऊपर, स्पेन में सात सौ से ज्यादा, जर्मनी में करीब चार सौ और अमेरिका में चौहत्तर से ज्यादा दिखी। 12 मार्च को दुनिया भर में इस बीमारी की वजह से कुल 134 लोगों की मौत हुई, जिनमें चीन में 11, ईरान में 14, स्पेन में 29 लोगों की मौत हुई है।

अब स्थिति यह है कि चीन के वुहान और दूसरे शहरों की तरह इटली यूरोप का, ईरान पश्चिम एशिया का और वॉशिंगटन अमेरिका का कोरोना वायरस का केंद्र बन गया है। इन देशों में मृत्यु दर ज्यादा है क्योंकि कई सप्ताह से यह बीमारी फैलती रही लेकिन सरकारी फाइलों में ये नंबर दर्ज नहीं हो रहे थे।

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